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Mantra Siddha Kavach - Yolagk.yolasite.com/resources/GURUTVA KARYALAY Mantra Siddha...Mantra Siddha Kavach Our Mantra Siddha Kawach prepared in Auspicious Muhurat (Shubh Mahurat) and

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Text of Mantra Siddha Kavach - Yolagk.yolasite.com/resources/GURUTVA KARYALAY Mantra Siddha...Mantra Siddha...

  • Mantra Siddha Kavach

    Our Mantra Siddha Kawach prepared in Auspicious Muhurat (Shubh Mahurat) and Special Day for make it very powerful and Early effectiveness in Particular purpose or Your Wish Fulfillment.

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    Our All Kawach Are Complate Pran Pratisthit (Puarn Praan Pratisthit) You Do not Need to Chant Any Mantra or perform Special Rituals For Any Kavach Because

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    Kawach Name Kawach Benifits Price

    अमोघ महामतृययुंजय कवच Amogh Mahamrutyunjay Kawach

    मदद जन्भ कुॊ डरी भें भतृ्म ुका मोग फन यहा हो, भायक ग्रहों की दशा के दौयान प्राणबम, शत्रआुदद के कायण प्राणबम, आकस्मभक कुण्डरी भें दरु्घटनाओॊ के मोग फन यहे हो, फाय-फाय मवाम्म सॊफॊधधत सभममाएॊ कष्ट दे यदह हो, औषधधमों का प्रबाव रेशभात्र हो यहा हो आदद सबी कायण स्जससे प्राण सॊकट भें हो तफ शामत्रोक्त भतानशुाय अभोर् भहाभतृ्मुॊजम कवच सवघशे्रष्ठ उऩाम भाना जाता हैं। शामत्रों भें वर्णघत हैं की एक फाय देवी बगवती ने बगवान शशव से ऩूछा कक प्रब ूअकार भतृ्म ुसे यऺा कयने औय सबी प्रकाय के अशबुों से यऺा का कोई सयर उऩाम फताइए। तफ बगवान शशव ने भहाभतृ्मुॊजम कवच के फाये भें फतामा। भहाभृॊत्मजुम कवच को धायण कयके भनषु्म का सबी प्रकाय के अननष्ट से फच होता हैं औय

    10900

    http://www.tfaforms.com/254389

  • अकार भतृ्म ुको बी टार सकता हैं। अभोद्म ्भहाभतृ्मुॊजम कवच व उल्रेर्ित अन्म साभग्रीमों को शामत्रोक्त ववधध-ववधान से ववद्वान ब्राह्भणो द्वाया सवा राि भहाभतृ्मुॊजम भॊत्र जऩ एवॊ दशाॊश हवन द्वाया ननशभघत ककमा जाता हैं इस शरए कवच अत्मॊत प्रबावशारी होता हैं।

    राज राजेश्वरी कवच Raj Rajeshwari Kawach

    श्री याज याजेश्वयी कवच को धायण कयने से व्मस्क्त को सिु सभवृि, धन, ऐश्वमघ, भान-सम्भान, सौबाग्म आदद की काभनाएॊ ऩूणघ होती हैं। मह कवच ववशेष रुऩ से याजकामघ अथाघत सयकाय से जड़ेु कामों भें ववशेष सपरता प्रदान कयने वार हैं। कवच के प्रबाव से सकर प्रकाय के याज कामघ सयरता से ऩूणघ होते हैं। सयकायी ववबाग एवॊ साभास्जक कामघ कयने वारों को कवच के प्रबाव से ववशेष राब की प्रास्तत होती हैं।

    11000

    सवव कायव ससद्धि कवच Sarv Karya Siddha Kawach

    स्जस व्मस्क्त को राि प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के फादबी उसे भनोवाॊनछत सपरतामे एवॊ ककमे गमे कामघ भें शसवि (राब) प्रातत नहीॊ होती, उस व्मस्क्त को सवघ कामघ शसवि कवच अवश्म धायण कयना चादहमे। कवच के प्रभिु राब: सवघ कामघ शसवि कवच के द्वाया सिु सभवृि औय नव ग्रहों के नकायात्भक प्रबाव को शाॊत कय धायण कयता व्मस्क्त के जीवन से सवघ प्रकाय के द:ुि-दारयद्र का नाश हो कय सिु-सौबाग्म एवॊ उन्ननत प्रास्तत होकय जीवन भे सशब प्रकाय के शबु कामघ शसि होते हैं। स्जसे धायण कयने से व्मस्क्त मदद व्मवसाम कयता होतो कायोफाय भे ववृि होनत हैं औय मदद नौकयी कयता होतो उसभे उन्ननत होती हैं। • सवघ कामघ शसवि कवच के साथ भें सवघजन वशीकयण कवच के शभरे होने की वजह से धायण कताघ की फात का दसूये व्मस्क्तओ ऩय प्रबाव फना यहता हैं। • सवघ कामघ शसवि कवच के साथ भें अष्ट रक्ष्भी कवच के शभरे होने की वजह से व्मस्क्त ऩय सदा भाॊ भहा रक्ष्भी की कृऩा एवॊ आशीवाघद फना यहता हैं। स्जमसे भाॊ रक्ष्भी के अष्ट रुऩ (१)-आदद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)- धमैघ रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-सॊतान रक्ष्भी, (६)-ववजम रक्ष्भी, (७)-ववद्मा रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी

    4600

  • इन सबी रुऩो का अशीवाघद प्रातत होता हैं। • सवघ कामघ शसवि कवच के साथ भें तॊत्र यऺा कवच के शभरे होने की वजह से ताॊत्रत्रक फाधाए दयू होती हैं, साथ ही नकायात्भक शस्क्तमो का कोइ कुप्रबाव धायण कताघ व्मस्क्त ऩय नहीॊ होता। इस कवच के प्रबाव से इषाघ-द्वेष यिने वारे व्मस्क्तओ द्वाया होने वारे दषु्ट प्रबावो से यऺा होती हैं। • सवघ कामघ शसवि कवच के साथ भें शत्र ुववजम कवच के शभरे होने की वजह से शत्र ुसे सॊफॊधधत सभमत ऩयेशाननओ से मवत् ही छुटकाया शभर जाता हैं। कवच के प्रबाव से शत्र ुधायण कताघ व्मस्क्त का चाहकय कुछ नही त्रफगाड़ सकते। अन्म कवच के फाये भे अधधक जानकायी के शरमे कामाघरम भें सॊऩकघ कये: ** ककसी व्मस्क्त ववशषे को सवघ कामघ शसवि कवच देने नही देना का अॊनतभ ननणघम हभाये ऩास सयुक्षऺत हैं।

    श्री घुंटाकर्व महावीर सवव ससद्धि प्रद कवच Shri Ghantakarn Mahavir

    Sarv Siddhi Prad Kawach

    कवच को धायण कयने से धायण कताघ की सकर भनोकाभनाएॊ ऩूणघ होती हैं। उसका सबी प्रकाय के बतू-पे्रत आदद उऩद्रव से यऺण होता हैं। दषु्ट व असयुी शस्क्तमों से उत्ऩन्न होने वारे सबी प्रकाय के बम कवच के प्रबाव से दयू हो जाते हैं। कवच को धायण कयने से साधक को धन, सिु, सभवृि, ऎश्वमघ, सॊतस्त्त-सॊऩस्त्त आदद की प्रास्तत होती हैं। साधक की सबी प्रकाय की सास्त्वक इच्छाओॊ की ऩूनत घ होती हैं। मदद ककसी व्मस्क्त ऩय वशीकयण, भायण, उच्चाटन इत्मादद जाद-ूटोने वारे प्रमोग ककमे गमें होतो इस कवच के प्रबाव से मवत् नष्ट हो जाते हैं औय बववष्म भें मदद कोई प्रमोग कयता हैं तो यऺण होता हैं। कवच धायण कताघ को मदद कोई इषाघ, रोब, भोह मा शत्रतुावश मदद अनधुचत कभघ कयके ककसी बी उद्देश्म से साधक को ऩयेशान कयने का प्रमास कयता हैं तो कवच के प्रबाव से साधक का यऺण तो होता ही हैं, कबी-कबी शत्र ुके द्वाया ककमा गमा

    6400

  • अनधुचत कभघ शत्र ुऩय ही उऩय उरट वाय हो जाते हैं।

    सकऱ ससद्धि प्रद गायत्री कवच Sakal Siddhi Prad Gayatri Kawach

    वेदों भें उल्रेि हैं की देवी गामत्री सबी प्रकाय के ऻान औय ववऻान की जननी है, देवी गामत्री की उऩासना कयने से साधक ८४ कराओॊ का ऻाता हो जाता हैं। भाना जाता हैं की शसि की हुई गामत्री काभधेन ुके सभान हैं। गॊगा शयीय के ऩाऩों को ननभघर कयती है, गामत्री रूऩी ब्रह्भ गॊगा से आत्भा ऩववत्र होती हैं। स्जस प्रकाय देवी गामत्री ऩाऩों का नाश कयने वारी है, सभमत साॊसारयक औय ऩायरौककक सिुों को प्रदान कयने वारी हैं। उसी प्रकाय सकर शसवि प्रद गामत्री कवच को धायण कयने से साधक के सभमत योग-शोक-बम, बतू-पे्रत, तॊत्र फाधा, चोट, भायण, भोहन, उच्चाटन, वशीकयण, मतॊबन, काभण-टूभण, इत्मादद उऩद्रवों इत्मादद उऩद्रवों का नाश होता हैं। साधक को धभघ, अथघ, काभ औय भोऺ की प्रास्तत बी सॊबॊव हैं! सकर शसवि प्रद गामत्री कवच को धायण कयने से भिूघ से भिूघ औय जड़ से जड़ व्मस्क्त बी ववद्वान होने भें सभथघ हो सकता हैं! साधन को असाध्म योग एवॊ ऩयेशानीमों से भसु्क्त शभर सकती हैं! ददन-प्रनतददन साधन की धन-सॊऩस्त्त की ववृि एवॊ यऺा होती हैं। ग्रह जननत ऩीड़ाओॊ से यऺा होती। साधन को अऩने कामों भें अद्भतू सपरतामें शभर जाती हैं। कवच धायण कयने से धचत्त शिु होता है औय रृदम भें ननभघरता आती हैं। शयीय नीयोग यहता है, मवबाव भें नम्रता आती है, फुवि सकू्ष्भ होने से साधक की दयूदशशघता फढ़ती है औय मभयण शस्क्त का ववकास होता हैं। अनधुचत काभ कयने वारों के दुघगुण गामत्री के कायण छूट सकते हैं ।

    6400

    दस महा द्धवद्या कवच Dus Mahavidya Kawach

    मह कवच दस भहा ववद्मा के शस्क्तमों से सॊऩन्न अत्मॊत प्रबावशारी औय दरुघब कवच हैं। इस कवच के भाध्मभ से साधक को दसो भहाववद्माओॊ आशशवाघद प्रातत होता हैं। दस भहा ववद्मा कवच को धायण कयने से साधक की सबी भनोकाभनाओॊ की ऩूनत घ होती हैं। दस भहा ववद्मा कवच साधक की सभमत इच्छाओॊ की ऩूनत घ कयने भें सभथघ एवॊ उसे

    6400

  • शस्क्तसॊऩन्न एवॊ बशूभवान फनाने भें सभथघ हैं। साधक को दस भहा ववद्मा देवीमों की कृऩा से सॊसाय की सभमत शसविमों की प्रास्तत सॊबव हैं। दस भहा ववद्मा की कृऩा से साधक को धभघ, अथघ, कार व ्भोऺ चतुववघध ऩुरुषाथों की प्रास्तत होती हैं। दस भहा ववद्मा कवच भें दगुाघ के दस अवतायों का आशीवाघद सभादहत होता हैं, स्जससे जीवन को ननयॊतय अधधक से अधधक साथघक एवॊ सपर फनामा जा सकता हैं। दश भहाववद्मा को शामत्रों भें आद्मा बगवती के दस बेद कहे हैं, जो क्रभश् (१) कारी, (२) ताया, (३) षोडशी, (४) बवुनेश्वयी, (५) बयैवी, (६) नछन्नभमता, (७) धभूावयी, (८) फगरा, (९) भातॊगी एवॊ (१०) कभास्त्भका। इस सबी देवी मवरुऩों को, सस्म्भशरत रुऩ भें दशभहाववद्मा के नाभ से जाना जाता हैं।

    नवदयगाव शक्ति कवच Navdurga Shakiti Kawach

    भाॊ दगुाघ के नवरुऩ क्रभश् 1. शरैऩुत्री 2. ब्रह्भचारयणी 3. चन्द्रर्ण्टा 4. कूष्भाण्डा 5. मकन्दभाता 6. कात्मामनी 7. कारयात्रत्र 8. भहागौयी 9. शसविदात्री हैं। नवदेवीमों के कवचों को एक साथ भें शभराकय फनाकय नवदगुाघ कवच का ननभाघण ककमा जाता हैं। स्जससे धायण कताघ को नवदेवीमों का आशशवाघद एकसाथ प्रातत हो जाता हैं। नव देवीमों के कवच का भहत्व क्रभश् आऩके भागघदशघन हेत ुप्रमततु हैं। देवी शरैऩुत्री का कवच धायण कयने वारा व्मस्क्त सदा धन-धान्म से सॊऩन्न यहता हैं। अथाघत उसे स्जवन भें धन एवॊ अन्म सिु साधनो को कभी भहससु नहीॊ होतीॊ। व्मस्क्त को अनेक प्रकाय कक शसविमाॊ एवॊ उऩरस्धधमाॊ प्रातत होती हैं। देवी ब्रह्भचारयणी कवच धायण कयने वारे व्मस्क्त को अनॊत पर कक प्रास्तत होती हैं। कवच के प्रबाव से व्मस्क्त भें तऩ, त्माग, सदाचाय, सॊमभ जसेै सद् गुणों कक ववृि होती हैं। देवी चन्द्रर्ण्टा का कवच धायण कयने से व्मस्क्त को सबी ऩाऩों से भसु्क्त शभरती हैं उसे सभमत साॊसारयक आधध-व्माधध से भसु्क्त शभरती हैं। इसके उऩयाॊत

    6400

  • व्मस्क्त को धचयाम,ु आयोग्म, सिुी औय सॊऩन्न होनता प्रातत होती हैं। कवच के प्रबाव से व्मस्क्त के साहस एव ववयता भें ववृि होती हैं। व्मस्क्त मवय भें शभठास आती हैं उसके आकषघण भें बी ववृि होती हैं। क्मोकक, चन्द्रर्ण्टा को ऻान की देवी बी भाना गमा है। देवी कूष्भाण्डा के कवच को धायण कयने वारे व्मस्क्त को सबी प्रकाय के योग, शोक औय क्रेश से भसु्क्त शभरती हैं, उसे आमषु्म, मश, फर औय फुवि प्रातत होती हैं। देवी मकॊ दभाता के कवच को धायण कयने से व्मस्क्त की सभमत इच्छाओॊ की ऩूनत घ होती हैं एवॊ जीवन भें ऩयभ सिु एवॊ शाॊनत प्रातत होती हैं। देवी कात्मामनी का कवच धायण कयने से व्मस्क्त को सबी प्रकाय के योग, शोक, बम से भसु्क्त शभरती हैं। कात्मामनी देवी को वैददक मगु भें मे ऋवष-भनुनमों को कष्ट देने वारे यऺ-दानव, ऩाऩी जीव को अऩने तेज से ही नष्ट कय देने वारी भाना गमा हैं। देवी कारयात्रत्र का कवच धायण कयने से अस्ग्न बम, आकाश बम, बतू वऩशाच इत्मादी शस्क्तमाॊ कारयात्रत्र देवी के मभयण भात्र से ही बाग जाते हैं, कारयात्रत्र शत्र ुएवॊ दषु्टों का सॊहाय कयने वारी देवी हैं। देवी भहागौयी का कवच को धायण कयने से व्मस्क्त के सभमत ऩाऩों से छुटकाया शभरता हैं। मह भाॊ अन्नऩूणाघ के सभान, धन, वैबव औय सिु-शाॊनत प्रदान कयने वारी एवॊ सॊकट से भसु्क्त ददराने वारी देवी भहागौयी का कवच हैं। देवी शसविदात्री के कवच को धायण कयने से व्मस्क्त कक सभमत काभनाओॊ कक ऩूनत घ होती हैं उसे ऋवि, शसवि कक प्रास्तत होती हैं। कवच के प्रबाफ से व्मस्क्त के मश, फर औय धन कक प्रास्तत आदद कामो भें चरी आ यहे फाधा-ववध्न सभातत हो जाते हैं। व्मस्क्त को मश, फर औय धन कक प्रास्तत होकय उसे भाॊ कक कृऩा से धभघ,

  • अथघ, काभ औय भोऺ कक बी प्रास्तत मवत् हो जाती हैं।

    रसायन ससद्धि कवच Rasayan Siddhi Kawach

    यसामन शसवि कवच ववशेष रुऩ से उन रोगों के शरए उऩमोगी हैं जो, धचककत्सा ऺेत्र से जड़ेु हैं, जसेै, धचककत्सक, वैद्म, डॉक्टय, औषधध, यसामनशामत्र, दवाई आदद। उनके शरए यसामन शसवि कवच अत्मॊत राबप्रद शसि भाना गमा हैं। कुछ जानकायों का कथन हैं की धचककत्सा के कामघ कयने वारे व्मस्क्त मदद अऩने अभ्मास व अध्ममन के दौयान इस कवच का प्रमोग कयते हैं तो इस कवच के प्रबाव से धचककत्सा से जडेु सबी कामों भें शीघ्र सपरता प्रातत हो जाती हैं। व्मस्क्त कवच के प्रबाव से व्मस्क्त को औषध, धचककत्सा से सॊफॊधधत सकर ववद्माओॊ की प्रास्तत हो जाती हैं। वह इन ववद्माओॊ को प्रातत कय उस ववद्मा भें ववशेषऻ फन सकते हैं। यसामन शसवि कवच के प्राबाव से धचककत्सक मा डॉक्टय द्वाया धचककत्सा प्रातत योगी बी शीघ्र मवम्म राब प्रातत कयने भें सऺभ होते है।

    6400

    ऩुंचदेव शक्ति कवच Pancha Dev Shakti Kawach

    ऩॊचदेव दहन्द ूधभघ के ऩाॉच प्रधान देवताओॊ को कहाॉ जाता हैं, स्जनकी ऩूजा-उऩासना आदद दहन्द ूधभघ भें ववशेष रुऩ से प्रचशरत हैं। दहन्द ूधभघ भें ककसी बी शबु औय भाॊगशरक कामघ भें ऩॊचदेवताओॊ की ऩूजा को अननवामघ भाना गमा है। इन ऩाॉच देवताओॊ के रुऩ भें बगवान श्रीगणेश, शशव, ववष्ण,ु दगुाघ औय समूघ की आयाधना कक जाती हैं। ववद्वानों ने अऩने अनबुवों के आधाय से मह ऩामा हैं की इन ऩॊचदेव अथाघत श्री गणेश, शशव, ववष्ण,ु दगुाघ औय समूघ की सॊमकु्त कृऩा से जीवन भें बौनतक सिु-साधनों की प्रास्तत व आशशवाघद प्रातत कयने का उत्तभ भाध्मभ ऩॊचदेव शस्क्त कवच हैं। ऩॊचदेव शस्क्त कवच को धायण कयने से व्मस्क्त को सिु-सौबाग्म एवॊ ऐश्वमघ की प्रास्तत होती हैं औय उसके सकर भनोयथ शसि होने रगते हैं औय उसके जीवन से सबी प्रकाय के दु् ि, योग, शोक एवॊ ववघ्न-फाधाओॊ का मवत् नाश होता हैं।

    6400

    सयवर्व ऱक्ष्मी कवच सवुणघ रक्ष्भी कवच को धायण कयने से धन-सॊऩस्त्त, यत्न-आबषूण आदद की ववृि 4600

  • Suvarn Lakshmi Kawach होती हैं। सवुणघ रक्ष्भी कवच को धायण कयने से सवुणघ से सॊफॊधधत कामों भें ववशेष राब की प्रास्तत होती हैं। ववशबन्न मत्रोत से आधथघक राब शभरने के मोग फनते हैं। सवुणघ से सॊफॊधधत सबी अशबराषाएॊ शीघ्र ही ऩूणघ होने की प्रफर सॊबावनाएॊ फनती हैं।

    स्वर्ावकषवर् भैरव कवच Swarnakarshan Bhairav Kawach

    बयैव जी को बगवान शशव के द्वादश मवरूऩ के रुऩ भें ऩूजा जाता हैं। बयैवजी को तीन मवरुऩ फटुक बयैव, भहाकार बयैव औय मवणाघकषघण बयैव के रुऩ भें जाना जाता हैं। ववद्वानों ने मवणाघकषघण-बयैव को धन-धान्म औय सम्ऩस्त्त के देवता भाना है। धभघग्रॊथों भें उल्रेि शभरता हैं की आधथघक स्मथती ददन-प्रनतददन ियाफ होती जायही हो, कजघ का फोझ फढ़ता जा यहा हो, सभममा के सभाधान हेत ुकोई यामता न ददिाई दे यहा हो, सबी प्रकाय के ऩूजा ऩाठ, भॊत्र, मॊत्र, तॊत्र, मऻ, हवन, साधना आदद से कोई ववशेष राब की प्रास्तत न हो यही हो, तफ मवणाघकषघण बयैव जी का भॊत्र, मॊत्र, साधना इत्मादद का आश्रम रेना चादहए। जो व्मस्क्त मवणाघकषघण बयैव की साधना, भॊत्र जऩ आदद को कयने भें असभथघ हो वह रोग मवणाघकषघण बयैव कवच को धायण कय ववशेषा राब प्रातत कय सकते हैं। मवणाघकषघण बयैव कवच को धन प्रास्तत के शरए अचकू औय अत्मॊत प्रबावशारी भाना जाता हैं। मवणाघकषघण बयैव कवच धायण कताघ की सबी प्रकाय की आधथघक सभममाओॊ को सभातत कयने भें सभथघ हैं। इसभें जया बी सॊदेह नहीॊ हैं। इस करमगु भें स्जस प्रकाय भतृ्म ुबम के ननवायण हेत ुभहाभतृ्मुॊजम कवच अभोर् है उसी प्रकाय आधथघक सभममाओॊ के सभाधान हेत ुमवणाघकषघण बयैव कवच अभोर् भाना गमा हैं। धाशभघक भान्मताओॊ के अनशुाय ऐसा भाना जाता हैं की बयैवजी की ऩजूा-उऩासना श्रीगणेश, ववष्ण,ु चॊद्रभा, कुफेय आदद देवताओॊ ने बी कक थी, बयैव उऩासना के प्रबाव से बगवान ववष्ण ुरक्ष्भीऩनत फने थे, ववशबन्न अतसयाओॊ को सौबाग्म शभरने का उल्रेि धभघग्रॊथो भें शभरता हैं। मदह कायण हैं की मवणाघकषघण बयैव कवच आधथघक सभममाओॊ के सभाधान हेत ुअत्मॊत राबप्रद हैं। इस कवच को धायण कयने से सबी प्रकाय से आधथघक राब की प्रास्तत

    4600

  • होती हैं।

    द्धवऱऺर् सकऱ राज वशीकरर् कवच Vilakshan Sakal Raj Vasikaran Kawach

    ववरऺण सकर याज वशीकयण कवच को धायण कयने से याज अधधकायी अथाघत सयकायी ववबाग भें कामघ कयने वारे अधधकारयमों को अऩने अनकूुर ककमा जाता सकता हैं। मदद कोई अधधकायी मा अफ़सय आऩको अनावश्मक ऩयेशान कय यहा हो, आऩके कामघ को त्रफना ककसी वज़ह से योक यहे हो, कामघ से सॊफॊधधत कोई ना कोई गरती ननकार यहे हो, कामघ के शरए फाय-फाय दौड़ा यहे हो, ऐसी सबी स्मथतीमों भें ववरऺण सकर याज वशीकयण कवच अधधकायीमों को अऩने अनकूुर फनाने के शरए सवोत्तभ भाध्म हैं। सयकायी ववबाग एवॊ साभास्जक कामघ कयने वारें रोगों के शरए बी ववरऺण सकर याज वशीकयण कवच धायण कयना ववशेष राब की प्रास्तत होती हैं।

    3250

    इष्ट ससद्धि कवच Isht Siddhi Kawach

    बक्त औय बगवान के फीच का रयश्ता पे्रभ, ववश्वास औय सभऩघण ऩय दटका हैं। मह तीन फातों से बक्त को अध्मास्त्भक औय आस्त्भक फर की प्रास्तत होती हैं। धभघग्रॊथो भें इष्ट शसवि के शरए ववशबन्न प्रकाय की धाशभघक ववधध-ववधान, साधना औय कभघकाण्ड का वणघन शभरता हैं। रेककन आज के आधनुनक दौय भें अऩनी आवश्मक्ताओॊ को ऩूया कयने शरए ददन-यात ऩरयश्रभ कयने वारे व्मस्क्त को सभम के इष्ट आयाधना के शरए ऩमाघतत सभम नहीॊ शभरता, मदद शभर बी जामे तो आयाधना भें भन नहीॊ रग ऩाता, भन बटकता यहता हैं। एसी स्मथती भें इष्ट शसवि कवच राबप्रद भाना गमा हैं। इस कवच के प्रबाव से धायण कताघ की एकाग्रता भें ववृि होती हैं, ऩूजा-उऩासना के दौयान भानशसक शाॊनत का अनबुव होता हैं स्जससे इष्ट शसवि शीघ्र प्रातत होने भें राब शभर सकता हैं। इष्ट शसवि कवच का ननभाघण इमसे उद्देश्म से ककमा जाता हैं की धायण कताघ को शीघ्र अऩने कामघ उद्दशे्म भें इस्च्छत सपरता प्रातत हो।

    2800

    ऩरदेश गमन और ऱाभ प्राक्ति कुछ रोग की ववदेश भें व्मवसाम मा नौकयी कयने की इच्छा होती है तो कुछ रोग 2350

  • कवच Pardesh Gaman Aur Labh Prapti Kawach

    ववदेश भें व्माऩाय कयने की चाहत यिते हैं तो कुछ रोगों की इच्छा ववदेश मात्रा कयने की होती हैं। व्मस्क्त की इच्छा होने ऩय बी उनके ववदेश से सॊफॊधधत कामघ उधचत प्रमत्न कयने के उऩयाॊत बी फनते-फनते यह जाते हैं मा कामघ भें रुकावटों के कायण ववरॊफ होता यहता हैं, एसी स्मथती भें ऩयदेश गभन औय राब प्रास्तत कवच को धायण कयने से धायण कताघ की भनोकाभनाएॊ शीघ्र ऩूणघ होने के मोग फनने रगते हैं।

    श्रीदयगाव बीसा कवच Durga Visha Kawach

    श्रीदगुाघ फीसा कवच साधक को बस्क्त के साथ सभमत साॊसारयक सिुों को प्रदान कयने वारा सवघशसविप्रद कवच हैं। श्रीदगुाघ फीसा कवच को धायण कयने से साधक को धभघ, अथघ, काभ औय भोऺ इन चाय की प्रास्तत भें बी सहामता प्रातत होती हैं। शामत्रोक्त वणघन हैं की देवी दगुाघ के श्रीदगुाघ फीसा कवच को धायण कयने से देवी प्रसन्न होकय, साधक की अशबष्ट इच्छाएॊ ऩणूघ कयती हैं। भाॉ दगुाघ अऩने बक्त की मवमॊ यऺा कय उन ऩय कृऩा दृष्टी कयती हैं। श्रीदगुाघ फीसा कवच धायण कयने से भाॉ दगुाघ की कृऩा से नौकयी व्मवसाम भें साधक को उन्ननत के शशिय ऩय जाने का भागघ प्रसमत होता हैं। श्रीदगुाघ फीसा कवच से साधक को धन-धान्म, सिु-सॊऩस्त्त, सॊतान का सिु प्रातत होता हैं औय शत्र ु ववजम, ऋण-योग आदद ऩीडा ा़ से भसु्क्त प्रातत होती हैं औय साधक को जीवन भें सॊऩूणघ सिुों की प्रास्तत होती हैं। जीवन भें ककसी बी प्रकाय के सॊकट मा फाधा की आशॊका होने ऩय श्रीदगुाघ फीसा कवच को श्रिाऩूवघक धायण कयने से साधक को सबी प्रकाय की फाधा से भसु्क्त शभरती हैं औय धन-धान्म की प्रास्तत होती हैं।

    1900

    अष्ट द्धवनायक कवच Asht Vinayak Kawach

    अष्ट ववनामक कवच को श्रीगणेश के आठ प्रभिु रूऩों की कृऩा प्रास्तत हेत ुधायण ककमा जाता हैं। बगवान श्री गणेश के इन आठ अवतायों भें ससृ्ष्ट के सिु की कल्ऩना का आधाय भाना जाता हैं। अष्ट ववनामक कवच कवच सकर ववघ्न-फाधाओॊ का नाश कयने औय कामों भें सपरता की प्रास्तत हेत ुउत्तभ हैं।

    1900

    द्धवष्र्य बीसा कवच ववष्ण ुफीसा कवच को धन, मश, सपरता औय उन्ननत की प्रास्तत हेत ुउत्तभ भाना 1900

  • Vishnu Visha Kawach जाता है। ववष्ण ुफीसा कवच को बगवान श्री ववष्ण ुको प्रसन्न कयने औय उनका आशशवाघद प्रास्तत के शरए धायण ककमा जाता है। दहन्द ूधभघग्रॊथों भें वर्णघत हैं की जहाॉ बगवान ववष्ण ुननवास कयते है, उस मथान ऩय भाॉ भहारक्ष्भी का बी ननवास होता है। स्जस बक्त ऩय ववष्ण ुप्रसन्न होते, कृऩा कयते हैं, उस बक्त ऩय देवी भहारक्ष्भी बी मवत् प्रसन्न होती हैं औय अऩनी कृऩा आशीवाघद प्रदान देती हैं। ववष्ण ुफीसा कवच को धायण कयने से व्मस्क्त को कामों भें शसवि व सपरता की प्रास्तत, मवाम्म औय साॊसारयक सिुों की ववृि होती है। ववद्वानों का अनबुव यहा हैं की श्री ववष्ण ुफीसा कवच को धायण कयने से शीघ्र ही धायणकताघ के र्य-ऩरयवाय भें सिु-सभवृि-ऐश्वमघ भें ववृि होने रगती हैं। ववष्ण ुफीसा कवच को धायण कयने से व्मस्क्त भें सकायात्भक ऊजाघ का सॊचाय होता हैं। उसके रुके हुवे कामघ सॊऩन्न होने रगते हैं। कामघऺ ेत्र भें सधुाय होने रगता हैं। शत्र,ु योग आदद नाना प्रकाय के बमों का ननवायण हो जाता हैं औय जीवन ऩयभ सिुी हो जाता हैं।

    रामभद्र बीसा कवच Ramabhadra Visha Kawach

    याभबद्र फीसा कवच को बगवान श्री याभ को प्रसन्न कयने औय उनका आशशवाघद प्रास्तत के शरए धायण ककमा जाता है। कवच को धायण कयने से भनषु्म के सफ कामघ शसि होते हैं। कवच को धायण कयने से व्मस्क्त की सबी प्रकाय के सॊशम, बम, फॊधनो का नाश होता हैं। स्जससे व्मस्क्त ननबघम होकय अऩने कामघ ऺते्र भें सपर होता हैं। सनातन धभघ भें याभ शधद को धभों का भरू भाना गमा हैं। इस कशरमगु भें सभम के अबाव भें स्जस व्मस्क्त के ऩाय जऩ, तऩ, मऻ आदद धाशभघक कामघ कयने का सभम नहीॊ होता, ऐसे भें याभ का नाभ ही एक भात्र सहाया हैं, क्मोकी, जो रोग कशरकार भें श्रीयाभ की शयण रेते हैं, उन्हें कशरमगु भें कोई फाधा नहीॊ ऩहुॊचाता। याभबद्र फीसा कवच श्री याभजी की कृऩा प्रानत का सयर भाध्मभ हैं।

    1900

    कय बेर बीसा कवच आज हय व्मस्क्त चाहता की उसके ऩास अऩाय धन-सॊऩस्त्त हो। उसके ऩाय दनुनमा का 1900

  • Kuber Visha Kawach हय ऐशो-आयाभ भौजदु हो, उसे कबी ककसी चीज की कभी न हो। एसे रोगो की इच्छाओॊ को ऩूणघ कयने भें सभथघ हैं कुफेय फीसा कवच जो देवताओॊ के कोषाध्मऺ कुफेय जी का कवच हैं। कुफेय फीसा कवच के प्रबाव से धायण कताघ ऩय मऺयाज कुफेय प्रसन्न होकय अतुर सम्ऩस्त्त का वयदान देते हैं, उसे अऺम धन कोष की प्रास्तत एवॊ आम ववृि के नमे-नमे मत्रोत फनने रगते हैं। मवणघ राब, यत्न राब, ऩैतकृ सम्ऩत्ती एवॊ गड़ ेहुए धन से राब प्रास्तत कक काभना कयने वारे व्मस्क्त के शरमे कुफेय फीसा कवच धायण कयना अत्मन्त राब दामक हो मकता हैं, एसा शामत्रोक्त वचन हैं। कुफेय फीसा कवच को धायण कयने से व्मस्क्त को एकाधधक मत्रोत्र से धन का प्रातत होकय धन सॊचम होता हैं। धन-सॊऩस्त्त एवॊ ऐश्वमघ की प्रास्तत हेत ुकुफेय फीसा कवच सवघशे्रष्ठ भाध्मभ हैं।

    गरुड बीसा कवच Garud Visha Kawach

    गरुड बगवान ववष्ण ुका वाहन हैं। जानकायो के भतानशुाय गरुड फीसा कवच को धायण कयने से सयरता से बगवान ववष्ण ुकी बी कृऩा प्रातत होती हैं, शत्र ु से सॊफॊधधत बमों का नाश होता हैं। सऩघबम आदद अनेक प्रकायकी व्माधधमाॊ दयू हो जाती हैं। गरुड फीसा कवच को र्य, दकुान, ऑकपस आदद के प्रवेश द्वाय ऩय रगाने से र्य भें ननवास कयने वारे सबी प्रकाय के सऩघ र्य छोड़कय बाग जाते हैं एवॊ कपय र्य भें प्रवेश नहीॊ कयते। गरुड फीसा कवच को धायण कयने मा बवन भें रगाने से सवघ प्रकाय के सिु-आनॊद भें ववृि होने रगती हैं। ववद्वानों ने इस कवच को अत्मॊत परदामक भाना हैं।

    1900

    ससुंह बीसा कवच Sinha Visha Kawach

    शस ॊह फीसा कवच देवी बगवती का धायण कयने से देवी की कृऩा प्रातत होती हैं। शस ॊह फीसा कवच भाॉ बगवती को प्रसन्न कयने औय उनका आशशवाघद के शरए ववशेष रुऩ से धायण ककमा जाता है। शस ॊह फीसा कवच को धायण कयने से सबी प्रकाय के बम दयू हो जाते हैं। शस ॊह फीसा कवच के प्रबाव से सबी प्रकाय के शत्र ु एवॊ ववयोधी

    1900

  • धायणकताघ के अनकूुर हो जाते हैं। शस ॊह फीसा कवच के को धायण कयने से व्मस्क्त का फडेा़ से फडा व फरशारी शत्र ुबी उससे बमबीत हो जाता हैं औय शत्रतुा छोड देता हैं। शस ॊह फीसा कवच आत्भववश्वास की ववृि एवॊ शत्रओुॊ को बमबीत कयने हेत ुअत्मॊत उऩमोगी हैं।

    नवावर् बीसा कवच Narvan Visha Kawach

    नवाणघ फीसा कवच देवी दगुाघ का कवच हैं। दहन्द ूधभघ भें देवी दगुाघ को दिुों का नाश कयने वारी कहा गमा हैं। देवी दगुाघ की शस्क्त को जाग्रत कयने हेत ुशामत्रों भें नवाणघ भॊत्र का जाऩ कयने का ववधान फतामा गमा हैं। ववद्वानों ने जो भनषु्म ननमशभत भॊत्र जाऩ कयने भें असभथघ हो उनके शरए नवाणघ फीसा कवच भॊत्र जऩ के सभान पर प्रदान कयने वारा फतामा हैं। नवाणघ फीसा कवच को धायण कयने से व्मस्क्त को धभघ, अथघ, काभ औय भोऺ इन चाय कक प्रास्तत भें बी सहाता प्रातत होती हैं।

    1900

    सुंकट मोचचनी कासऱका ससद्धि कवच Sankat Mochinee Kalika Siddhi Kawach

    कारी शधद का अथघ हैं "कार की ऩत्नी" दहन्द ूधभघ भें बगवान शशव को कार कहाॊ गमा हैं, इसशरए शशव की ऩत्नी को कारी नाभ से सॊफोधधत ककमा गमा हैं। बगवती कारी के रुऩ-बेद का वणघन ववशबन्न शामत्रों भें असॊख्म रुऩों भें ककमा गमा हैं। वामतव भें सबी देवीमाॊ, मोधगननमाॊ आदद बगवती की ही प्रनतरुऩा भानी गई हैं, स्जनके प्रभिु आठ बेद भाने जाते हैं। (१) धचन्ताभर्ण कारी, (२) मऩशघभर्ण कारी, (३) सन्तनतप्रदा कारी, (४) शसवि कारी, (५) दक्षऺण कारी, (६) काभकरा कारी, (७) हॊस कारी एवॊ (८) गुह्म कारी। इनके अनतरयक्त मह तीन बेद ववशेष प्रशसि हैं जो क्रभश् (१) बद्रकारी, (२) शभशान कारी तथा (३) भहाकारी, इनकी उऩासना बी ववशेष रुऩ से होती हैं। कारी कवच के ववषम भें ववद्वानों का कथन हैं की कारी कवच तीनों रोकों का आकषघण कयने वारा हैं। ऩूणघ श्रिा एवॊ ववधध-ववधान से ननशभघत कवच को धायण कयने वारा प्राणी त्ररैोक्म ववजमी हो सकता हैं। वह त्ररैोक्म को भोदहत कयने वारा, भहाऻानी तथा सभमत शसविमों का मवाभी फन सकता हैं। कवच को अऩने कॊ ठ

    1900

  • अथवा दामीॊ बजुा ऩय धायण कयने वारा व्मस्क्त धनवान, सॊतानवान, श्रीवान तथा अनेक ववद्माओॊ सम्ऩस्त्तमों का मवाभी फनता हैं। कुछ ववद्वानों ने अऩने अनबुवों भें ऩामा हैं की ववधध-ववधान से ननशभघत इस कवच के प्रबाव से भतृवत्सा, वन्ध्मा अथवा सॊतान हीन मत्री मदद कवच को अऩने कॊ ठ अथवा बजुा ऩय धायण कयती हैं तो उसे सॊतान सिु प्रातत हो सकता हैं। ववद्वानों का कथन हैं की इस कवच को ककसी ऩयामे शशष्म, बस्क्तदहन मा अऩरयधचत को नहीॊ देना चादहए। इस शरए कवच केवर उसी को प्रातत होना चादहए जो इसके शरए मोग्म हो।

    राम रऺा कवच Ram Raksha Kawach

    याभ यऺा कवच बगवान श्री याभ को प्रसन्न कयने औय उनका आशशवाघद प्रास्तत के शरए धायण ककमा जाता है। याभ यऺा कवच को धायण कयने से सबी प्रकाय के बम औय फाधाओॊ से भसु्क्त शभरती हैं। कामो भें सपरता प्रास्तत हेत ु याभ यऺा कवच उत्तभ हैं। याभ यऺा कवच के प्रबाव से से धायणकताघ को धन राब होता हैं व उसका का सवाांगी ववकाय होकय उसे सिु-सभवृि, भान-सम्भान की प्रास्तत होती हैं। याभ यऺा कवच सबी प्रकाय के अशबु प्रबाव को दयू कय व्मस्क्त को जीवन भें सबी प्रकाय की कदठनाइमों से यऺा कयता हैं। ववद्वानो के भत से जो व्मस्क्त बगवान याभ के बक्त हैं मा श्री हनभुानजी के बक्त हैं उन्हें अऩने कामघ उद्दशे्म भें सपरता हेत ुयाभ यऺा कवच को अवश्म धायण कयना चादहमे स्जससे आने वारे सॊकटो से यऺा हो कय उनका जीवन सिुभम व्मतीत हो सके एवॊ उनकी सभमत आदद बौनतक व आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणघ हो सके।

    1900

    हनयमान कवच Hanuman Raksha Kawach

    हनभुान कवच बगवान श्री हनभुान को प्रसन्न कयने औय उनका आशशवाघद प्रास्तत के शरए धायण ककमा जाता है। शामत्रों भें उल्रेि हैं की श्री हनभुान जी को बगवान समूघदेव ने ब्रह्भा जी के आदेश ऩय हनभुान जी को अऩने तेज का सौवाॉ बाग प्रदान कयते हुए आशीवाघद प्रदान ककमा था, कक भैं हनभुान को सबी शामत्र का ऩूणघ ऻान

    1900

  • दूॉगा। स्जससे मह तीनोरोक भें सवघ शे्रष्ठ वक्ता होंगे तथा शामत्र ववद्मा भें इन्हें भहायत हाशसर होगी औय इनके सभन फरशारी औय कोई नहीॊ होगा। जानकायो ने भतानशुाय हनभुान कवच धायण कयने से ऩुरुषों की ववशबन्न फीभारयमों दयू होती हैं, हनभुान कवच भें अद्भतु शस्क्त सभादहत होने के कायण मह व्मस्क्त की मवतन दोष, धात ुयोग, यक्त दोष, वीमघ दोष, भछूाघ, नऩुॊसकता इत्मादद अनेक प्रकाय के दोषो को दयू कयने भें अत्मन्त राबकायी हैं। अथाघत मह कवच ऩौरुष को ऩुष्ट कयता हैं। श्री हनभुान कवच व्मस्क्त को सॊकट, वाद-वववाद, बतू-पे्रत, द्मतू कक्रमा, ववषबम, चोय बम, याज्म बम, भायण, सम्भोहन मतॊबन इत्मादद से सॊकटो से यऺा कयता हैं औय शसवि प्रदान कयने भें सऺभ हैं।

    भैरव रऺा कवच Bhairav Raksha Kawach Lakshmi Visha Kawach

    बयैवयऺा कवच बयैव जी को शीघ्र को प्रसन्न कयने औय उनका आशशवाघद के शरए धायण ककमा जाता है। बयैव यऺा कवच धायण कयने से तॊत्र-भॊत्र, बतू-पे्रत आदद नकायात्भक प्रबावों से यऺा होती हैं। बयैव यऺा कवच को धायण कयने से मवाम्म सिु भें ववृि होकय सकायात्भक उजाघ भें ववृि होती हैं। कवच के प्रबाव से धायण कताघ को ऋण, योग औय शत्रओुॊ ऩय ववजम प्रातत कयने भें सपरता प्रातत हो सकती है। सबी प्रकाय की व्मवसाम औय नौकयी से सॊफॊधधत सभममाओॊ का ननवायण कयने भें बी बयैव यऺा कवच राबकायी शसि होता है।

    1900

    सववजन वशीकरर् कवच Sarvjan Vashikaran Kawach

    आज के आधनुनक मगु भें अऩने कामघ उद्देश्म की ऩूनत घ हेतु हभें योजभया के जीफन भें जाने-अन्जाने कई रोगों से शभरना ऩडता हैं। स्जसभें सभाजके छोटे-फड़े सबी वगघ के मत्री-ऩुरूष, ग्राहक, अधधकायी, सहकभी, नौकय-चाकय आदद सबी तयह के रोग होते हैं। उन सफ ऩय अऩना सकायात्भक प्रबाव फनाना हभाये शरए अत्मॊत आवश्मक हैं, कोमोकी मदद हभाये व्मस्क्तत्व भें कोई ववशेष प्रबाव हो अथवा हभायी फातों भें मा चेहये ऩय चमु्फकीम आकघ षण हो स्जसे सनुते मा देिते ही साभने वारा प्रबाववत हो

    1450

  • जाए औय हभायी फातों का उस ऩय ऩूणघ रुऩ से सकायात्भक प्रबाव हो जामे तो हभाये ककतने ही कामघ सयरता से ऩूणघ हो सकते हैं! मदद आऩकी कोइ फात जो ऩूणघरुऩ से उधचत हैं औय आऩके इष्ट शभत्र, ऩरयजन मा वप्रमजन कोइ उसे भानता नहीॊ हैं ऐसी स्मथती भें सवघजन वशीकयण कवच अत्मॊत राबप्रद होता हैं। मदद आऩ ककसी व्माऩाय, फीभा मा ककसी भाकेदटग इत्मादद से सॊफॊधधत कामों से जड़ेु हैं, औय ग्राहक मा उऩबोक्ता आऩके उत्ऩाद चाहे वह ककतने बी अच्छी गुणवत्ता वारे, अच्छी सेवा सेवा प्रदान कयने वारे मा राबप्रदान कयने वारे हो, कपय बी ग्राहक मा उऩबोक्ता आऩके उत्ऩाद, सेवा मा राबप्रद सौदे को नहीॊ चनुकय ककसी कभ गुणवत्ता वारे, कभ सेवा, कभ राब वारे सौदे को चनुरेता हैं मा आऩके प्रनतमऩधधघ से वह उत्ऩाद, सेवा प्रातत कय रेते हो तो ऐसी स्मथती भें सवघजन वशीकयण कवच अत्मॊत राबप्रद होता हैं। क्मोकक, सवघजन वशीकयण कवच के प्रबाव से साभने वारे ऩय आऩकी फातों का सकायात्भक प्रबाव ऩड़ता हैं, स्जसभें आऩकी फातों का ऩूणघ प्रबाव साभने वारे ऩय होता हैं। स्जस कायण आऩको अऩने कामघ भें शीघ्र सपरता प्रातत हो सकती हैं, इसभें जया बी सॊदेह नहीॊ। सवघजन वशीकयण कवच अत्मॊत अनबुतू एवॊ शीघ्र प्रबावी कवच भाना जाता हैं। सवघजन वशीकयण कवच धायण कयने से धायण कताघ के व्मस्क्तत्व भें ववशेष आकघ षण उत्ऩान होता हैं मा उसभें ननिाय आता हैं। ववशेष नोट: सवघजन वशीकयण कवच का प्रमोग केवर शबुकामों हेत ुकयने से ववशेष राब प्रातत होता हैं। गरत कामघ उद्देश्म के दौयान सवघजन वशीकयण कवच का प्रबाव दसूयो ऩय नहीॊ होता हैं। सबी कवच केवर सही फात औय उद्देश्म हेत ुकवच कामघ कयते हैं, गरत कामघ मा उद्देश्म हेत ुनहीॊ।

    ससद्धि द्धवनायक कवच शसवि ववनामक कवच को ववशेष शामत्रोक्त ववधध-ववधान से तैमाय ककमा जाता हैं, 1450

  • Siddhi Vinayak Ganapati Kawach

    स्जससे धायण कताघ के सबी प्रकाय के ववघ्न-फाधाओॊ का नाश हो कय उसे अऩने इस्च्छत कामों भें शीध्र सपरता की प्रास्तत हो, श्री गणेशजी के आशशवाघद से धायण कताघ को सबी शबु कामों भें सयरता से शसवि प्रातत हो सकती हैं औय उसे सबी प्रकाय से सिु प्रातत हो जाते हैं। गणेशजी की कृऩा से धायण कताघ को ववद्मा-फुवि की प्रास्तत होती हैं। शामत्रों भें बगवान श्री गणेश को सभमत शसविमों को देने वारा भाना गमा है। सायी शसविमाॉ गणेश भें वास कयती हैं। बगवान श्री गणेश अऩने बक्तो के सभमत ववघ्न फाधाओॊ को दयू कयने वारे ववनामक हैं। कवच को श्रीगणेशजी की कृऩा प्रास्तत हेत ुधायण कयना अत्मॊत राबप्रद भाना गमा हैं। शसवि ववनामक कवच को बगवान श्री गणेश को प्रसन्न कयने के शरए धायण ककमा जाता है।

    सकऱ सम्मान प्राक्ति कवच Sakal Samman Praapti Kawach

    सकर सम्भान प्रास्तत कवच को धायण कयने से धायणकताघ द्वाया ककमे गमे कामघ भें साभास्जक भान-सम्भान औय ऩद-प्रनतष्ठा भें ववृि होती हैं। कुछ रोगो को एसा रगता हैं की उसके ऩरयजन मा वप्रमजन उसका सम्भान नहीॊ कयते, ककतना बी अच्छा कामघ कयने ऩय बी उनका भान-सम्भान नहीॊ कयते मा फाय-फाय उनका भजाक उडाते हो, उनका अऩभान कयते हो, एसी स्मथती भें सकर सम्भान प्रास्तत कवच अत्मॊत राबदामक शसि होता हैं। सकर सम्भान प्रास्तत कवच को धायण कयने से धायण कताघ के सभास्जक भान-प्रनतष्ठा भें ववृि होती हैं, स्जससे धायण कताघ का साभास्जक जीवन उच्च मतय का हो सकता हैं। इष्ट शभत्र एवॊ वप्रमजनों से बी भान-सभान की प्रास्तत होती हैं।

    1450

    आकषवर् वदृ्धि कवच Aakarshan Vruddhi Kawach

    आजके बौनतक मगु भें हय भनषु्म चाहे वह मत्री हो मा ऩुरुष प्राम् सबी के शबतय एक ही सोच यहती हैं, कक उनकी सुॊदयता, मौवन औय व्मस्क्तत्व का आकघ षण सदैव फना यहे।

    1450

  • रेककन आजके बाग-दौड बये मगु भें कामघकी व्ममतता, धच ॊता, तनाव आदद ववशबन्न कायणों से औय उम्र के साथ-साथ व्मस्क्त की सुॊदयता, मौवन औय आकषघण कभ होने रगता हैं। एसी स्मथती भें आकषघण कवच अत्मॊत राबदामक शसि हो सकता हैं। आकषघण कवच को धायण कयने से व्मस्क्त की आकषघण शस्क्त भें ववृि होती हैं। कवच को रार धागें भें धायण कय स्जस व्मस्क्त को आकवषघत कयना हो, वह कवच के प्रबाव से आकवषघत हो सकता हैं। आकषघण कवच द्वाया शकु्र ग्रह को अनकूुर ककमा जाता हैं। क्मोकक, ज्मोनतषी ग्रॊथों भें शकु्र को ववऩयीत शर ॊग का कायक ग्रह भाना गमा है। ववऩयीत शर ॊग ववषमों की शबुता हेत ु आकषघण कवच भहत्वऩूणघ बशूभका ननबाता सकता हैं। आकषघण कवच के प्रबाव से धायण कताघ के व्मस्क्तत्व भें ववरक्ष्ण ननिाय आता हैं। ववद्वानो ने आकषघण कवच को दाॊऩत्म सिु भें ववृि के शरए बी ववशेष भहत्वऩूणघ भाना हैं। मदद गहृमथ सिु भें ददन-प्रनतददन न्मनूता आयही हो, ऩनत-ऩत्नी का एक दसूये के प्रनत आकषघण कभ हो यहाहो, ऐसी स्मथनत भें इस कवच को ववधध-ववधान से ऩणूघ श्रिाऩूवघक धायण कयने से शीघ्र राब होता हैं। आकषघण कवच को धायण कयने से व्मस्क्त को व्मवसाम, नौकयी आदद कामघऺ ेत्रों भें कामघऩूनत घ भें इस्च्छत सपरता प्रातत हो सकती हैं। साभास्जक भान-सभान भें ववृि होती हैं। इस कवच को धायण कयने से शायीरयक ही नहीॊ अवऩत ुआस्त्भक सुॊदयता का बी ववकास होता है।

    वशीकरर् नाशक कवच Vasikaran Nashak Kawach

    कबी-कबी एसा होता हैं भनषु्म अऩनी आवश्मक्ताओॊ की ऩूनत घ हेत ुदसूयों को अऩने अनकूुर फनाकय मा उसके उऩय ताॊत्रत्रक प्रमोग आदद कयके वशीकयण का दयू उऩमोग कयके उनकी धन-सम्ऩस्त्त, हीये-जवाहयात आदद हड़ऩ यहे हो मा उसे हड़ऩने का प्रमास कय यहे हो, मा व्मको को ककसी कामघ ववशेष हेत ुगरत तयीके से इमतेभार कय यहे हो, उसके प्रबावों भें पसा व्मस्क्त सही, गरत का अॊतय बरू कय उसके कहे अनशुाय कामघ ककमे जायहा हो, अऩनी फफाघदी की औय अग्रमत हो यहा हो, उसे इस

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  • फात का अनबुव हो यहा हो की उसके साथ गरत हो यहा हैं, कपयबी वह उसे ककमे जायहाहो ऐसी स्मथती भें सॊबवत मह वशीकयण का प्रबाव हो सकता हैं। स्जसके प्रबाव से व्मस्क्त राि चाहते हुवे बी उससे दयू नहीॊ यह सकता उसके कहे अनशुाय ही कामघ कताघ यहता हो ऐसी स्मथती भें वशीकयण नाशक कवच को धायण कयने मा कयवाने से दसूयों द्वाया ककमा गमा वशीकयण आदद का प्रबाव दयू होने रगता हैं। धायणकताघ व्मस्क्त वशीकयणकताघ के फॊधन से छूट जाता हैं। इस शरए वशीकयण काटने के शरए मह अत्मॊत प्रबावी कवच भाना जाता हैं।

    प्रीति नाशक कवच Preepi Nashak Kawach

    कबी-कबी जीवन भें ऐसा होता हैं की व्मस्क्त का ककसी से आवश्मक्ता से अधधक रगाव हो जाता हैं। चाहे वह मत्री हो मा ऩुरुष ददन-यात ददभाग भें उसकी ही सोच यहती हो, उसकी सुॊदयता, मौवन व उसका व्मस्क्तत्व देिकय उसके प्रनत सदैव आकघ षण फना यहता हो, स्जस के कायण अधधक धच ॊता, तनाव आदद ववशबन्न हो यही हो, स्मथती भें प्रीनत नाशक कवच अत्मॊत राबदामक शसि हो सकता हैं। जो व्मस्क्त ऩयाई मत्री-ऩुरुष इत्मादद के चक्कयों भें ऩड़ कय मा उसके प्रनत अधधक आकवषघत होकय अऩना जीवन नकघ फना यहे हो, उनके शरए प्रीनत नाशक कवच को ववधध-ववधान से ऩूणघ श्रिाऩूवघक धायण कयने से शीघ्र राब होता हैं।

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    अष्ट ऱक्ष्मी कवच Asht Lakshmi Kawach

    अष्ट रक्ष्भी कवच को धायण कयने से व्मस्क्त ऩय सदा भाॊ भहा रक्ष्भी की कृऩा एवॊ आशीवाघद फना यहता हैं। स्जमसे भाॊ रक्ष्भी के अष्ट रुऩ (१)-आदद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)-धयैीम रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-सॊतान रक्ष्भी, (६)-ववजम रक्ष्भी, (७)-ववद्मा रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन सबी रुऩो का मवत् अशीवाघद प्रातत होता हैं।

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    स्ऩ.ेव्याऩार वदृ्धि कवच Special Vyapar Vruddhi Kawach

    व्माऩाय ववृि कवच व्माऩाय भें शीघ्र उन्ननत के शरए उत्तभ हैं। चाहें कोई बी व्माऩाय हो अगय उसभें राब के मथान ऩय फाय-फाय हानन हो यही हैं। ककसी प्रकाय से व्माऩाय भें फाय-फाय फाधाएॊ उत्ऩन्न हो यही हो! तो सॊऩूणघ प्राण प्रनतस्ष्ठत भॊत्र शसि ऩूणघ चतैन्म मकु्त व्माऩाय ववृि कवच को धायण कयने से शीघ्र ही व्माऩाय भें ववृि

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  • एवॊ ननतन्तय राब प्रातत होता हैं।(एक से अधधक व्मवसाम हेत ुउत्तभ)

    आकक्स्मक धन प्राक्ति कवच Akashmik Dhan Prapti Kawach

    आकस्मभक धन प्रास्तत कवच अऩने नाभ के अनशुाय ही भनषु्म को आकस्मभक धन प्रास्तत हेत ुपरप्रद हैं इस कवच को धायण कयने से साधक को अप्रत्माशशत धन राब प्रातत होता हैं। चाहे वह धन राब व्मवसाम से हो, नौकयी से हो, धन-सॊऩस्त्त इत्मादद ककसी बी भाध्मभ से मह राब प्रातत हो सकता हैं। हभाये वषों के अनसुॊधान एवॊ अनबुवों से हभने आकस्मभक धन प्रास्तत कवच को धायण कयने से शेमय टे्रडड ॊग, सोने-चाॊदी के व्माऩाय इत्मादद सॊफॊधधत ऺेत्र से जडेु रोगो को ववशेष रुऩ से आकस्मभक धन राब प्रातत होते देिा हैं। आकस्मभक धन प्रास्तत कवच से ववशबन्न स्रोत से धनराब बी शभर सकता हैं।

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    स्वक्स्िक बीसा कवच Swastik Visha Kawach

    मवस्मतक फीसा कवच को धायण कयने से इष्ट कृऩा से व्मस्क्त के सभमत भनचाही इच्छाओॊ की ऩूनत घ होती हैं। शामत्रोक्त वणघन हैं की इस कवच को ववधध-ववधान से ननभाघण कय धायण कयने से धन-धान्म, उत्तभ सॊतान आदद की प्रास्तत होती हैं। कवच के प्रबाव से कैसा बी आशाहीन, असहाम, ननयाश व्मस्क्त हो उसकी सबी आशा औय आशमऩूणघ हो जाते हैं। धायण कताघ के सबी प्रकाय के भनोयथ शसि होते हैं। कवच के प्रबाव से सिु, सौबाग्म भें ववृि होती हैं, औय धायण कताघ का सबी प्रकाय से कल्माण होता हैं।

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    हुंस बीसा कवच Hans Visha Kawach

    हॊस फीसा कवच को ववद्माध्मन भें अत्माधधक राबप्रद भाना जाता हैं। कवच को धायण कयने से धायणकताघ की फुवि व मभयण शस्क्त तीव्र होती हैं, स्जससे शीघ्र मभयण की शस्क्त को फर शभरता हैं। फायफाय मभयण ककमा हुवा बरू जाने का बम कभ हो जाता हैं। धायण कताघ का ऻान एवॊ फुवि कुशाग्र हो जाती हैं। कवच के प्रबाव से धायण कताघ के अत्कयण ऩववत्र औय ननभघर हो जाते हैं, उसके ववचायों भें सकायात्भक उजाघ का सॊचाय होने रगता हैं। हॊस फीसा कवच को धायण कयने से भाॉ

    1050

  • सयमवती शीघ्र प्रसन्न होती हैं, इसशरए ववद्माधथघमों के शरए मह अत्मॊत राबप्रस कवच हैं।

    स्वतन भय तनवारर् कवच Swapn Bhay Nivaran Kawach

    स्जस व्मस्क्त को फाय-फाय अशबु मवतन के कायण अधधक बम मा उसकी अशबुता की धचॊता सता यही हो उनके शरए मवतन बम ननवायण कवच धायण कयना अत्मॊत राबदामक होता हैं। मदद ककसी को डयावने, अवप्रम, अशबुता सचूक मवतन आते हो स्जससे व्मस्क्त ननद्रा से उठ जाता हैं, एसे दु् मवतन को योकने के शरए मवतन बम ननवायण कवच धायण कयना राबप्रद होता हैं। मवतन बम ननवायण कवच के प्रबाव से दु् मवतन आने का बम दयू होता हैं।

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    भूसमऱाभ कवच Bhumilabh Kawach

    बशूभ, बवन, िेती से सॊफॊधधत व्मवसाम से जड़ेु रोगों के शरए बशूभराब कवच ववशेष राबकायी शसि हुता हैं। बशूभराब कवच को धायण कयने से धायण कताघ को बशूभ, बवन, िेती से सॊफॊधधत कामों भें अधधक राब होने के मोग फनते हैं अथवा जो रोग िेती, व्मवसाम मा ननवास मथान हेतु उत्तभ बशूभ आदद प्रातत कयना चाहते हैं, रेककन उस कामघ भें कोई ना कोई अड़चन मा फाधा-ववघ्न आते यहते हो स्जस कायण कामघ ऩूणघ नहीॊ हो यहा हो, तो उनके शरए बी बशूभ कवच उत्तभ परप्रद हो सकता हैं।

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    ऩदौन्नति कवच Padounnati Kawach

    ऩदौन्ननत कवच नौकयी ऩैसा रोगो के शरए ववशेष राबप्रद हैं। स्जन रोगों को अत्माधधक ऩरयश्रभ एवॊ शे्रष्ठ कामघ कयने ऩय बी नौकयी भें उन्ननत अथाघत प्रभोशन नहीॊ शभर यहा हो उनके शरए मह ववशेष राबप्रद हो सकता हैं।

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    ऋर् मयक्ति कवच Rinmukti Kawach

    ऋण भसु्क्त कवच कजघ से सॊफॊधधत सभममाओॊ को हर कयने भें ववशेष राब देता हैं, ऋण भसु्क्त कवच को धायण कयने से व्मस्क्त कजघ भसु्क्त से सॊफॊधधत कामों अनत शीध्र राब प्रातत होता हैं। स्जस व्मस्क्त के राि प्रमत्न कयने ऩय बी उसका कजघ ित्भ नहीॊ हो यहा हो, कजघ फढ़ता ही जा यहा हो उनके शरए मह ववशेष रुऩ से राबप्रद हैं।

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  • सयदशवन बीसा कवच Sudarshan Visha Kawach

    सदुशघन फीसा कवच धायणकताघ को सयुऺा प्रदान कयने वारा हैं। सदुशघन फीसा कवच को बगवान ववष्ण ु के सदुशघन चक्र के साभना सवघ प्रकाय से यऺाकायी हैं। सदुशघन फीसा कवच शस्क्तशारी कवच हैं, इसको धायण कयने से शत्रओुॊ का दभन होता हैं। जानकायों का अनबुव हैं की सदुशघन फीसा कवच भें सयुऺा प्रदान कयने वारी आश्चमघ शस्क्तमाॊ ननदहत होती हैं। कवच के प्रबाव से बगवान श्री कृष्ण का आशीवाघद सयरता से प्रातत होता हैं। सदुशघन फीसा कवच को धायण कयने से धायणकताघ के सबी प्रकाय के कष्ट एवॊ अननष्ट दयू होने रगते हैं। सदुशघन फीसा कवच को धायण कयने से व्मस्क्त की फुवि औय फर भें ववृि होती हैं।

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    महा सयदशवन कवच Mahasudarshan Kawach

    भहा सदुशघन कवच सदुशघन फीसा कवच के सभान परप्रदान कयने वारा हैं। 910

    त्रत्रशूऱ बीसा कवच Trishool Visha Kawach

    त्रत्रशरू फीसा कवच भखु्म रुऩ से शत्र ुऩय ववजम प्राप्र कयने एवॊ वाॊनछत कामों भें सपरता प्रातत कयने हेत ुधायण कयने से ववशेष राब की प्रास्तत होती हैं। त्रत्रशरू फीसा कवच के प्रबाव से शत्र ुधायणकताघ के अनकूुर हो सकता हैं। त्रत्रशरू फीसा कवच के प्रबाव से से व्मस्क्त का बमॊकय शत्र ुबी उससे डयते हैं औय शत्रतुा छोड देता हैं। त्रत्रशरू फीसा कवच कोटघ-कचयी के कामों भें सपरता प्रातत �